Thursday, 25 August 2016 17:56

आप फेसबुक पर हैं तो कुछ प्राइवेट नहीं है

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फेसबुक पर जो विज्ञापन दिखते हैं, उनसे ऐसा लगता है मानो फेसबुक ने आपके मन की बात जान ली है. आपके परिवार में किसी का जन्मदिन है और आपको केक और फूलों के विज्ञापन दिखाई देने लगते हैं.
ऐसा सभी के साथ हुआ है और आगे भी होगा. कई लोगों के लिए ये हैरानी की बात हो सकती है लेकिन ऑनलाइन दुनिया में अब ऐसी बातें देख कर हैरानी नहीं होनी चाहिए.


फेसबुक पर लोग जिस तरह अपनी जानकारी शेयर करते हैं उससे ये सब पता करना बहुत आसान हो जाता है.
आम लोगों के बारे में फेसबुक जितनी जानकारी इकठ्ठा करता है कोई सोशल नेटवर्क नहीं करता. वो 98 तरह की जानकारी इकठ्ठा करके उसी के हिसाब से ऑनलाइन विज्ञापन दिखाता है.
फ़ेसबुक आपकी लोकेशन, आपकी आय, आपकी पसंद-नापसंद, आपकी मौजूदा ज़रूरत, आपके पिछले सर्च, आपके निकटतम मित्रों से हुई आपकी बातचीत के कीवर्ड्स सब जानता है.
इन सबसे मिलकर आपकी प्रोफाइल बनती है और उसके बाद विज्ञापन देने वाली कंपनी तय करती है कि उसे किस तरह की प्रोफ़ाइल वाले लोगों तक पहुँचना है.
फेसबुक का मानना है कि जो विज्ञापन वो लोगों को दिखाता है वो मज़ेदार होने चाहिए, उनके काम के होने चाहिए.

जब भी आप फेसबुक पर लॉग इन होते हैं, ज्यादातर लोग तो कभी लाग आउट करते ही नहीं, तो फेसबुक को यह पता चलता रहता है कि इस वक़्त आपकी ऑनलाइन गतिविधियाँ क्या हैं, आप किस साइट पर हैं वगैरह.

यहाँ तक कि लॉग ऑफ करने के बाद भी फेसबुक के पास आपके बारे में काफ़ी जानकारी पहुंचती रहती है. हर बार जब आप कोई पेज लाइक या शेयर करते हैं तो उसके बारे में फेसबुक के पास पूरी जानकारी तो होती ही है.

अब बहुत सारी ऑनलाइन कंपनियाँ आपको फ़ेसबुक लॉग इन का इस्तेमाल करने के लिए कहती हैं, यानी उस साइट या ऐप पर आप जो भी करेंगे वो फ़ेसबुक को मालूम होगा.
नाम, उम्र, शहर, स्त्री या पुरुष जैसी बुनियादी जानकारी से आपकी प्राइमरी प्रोफ़ाइल बनती है, उसके बाद आप जो कुछ भी आनलाइन करते हैं उससे आपकी सेकेंडरी या डिटेल्ड प्रोफ़ाइल बनती है.
नौकरी, कंपनियां, गाड़ियां और उसके खरीदने का वर्ष, आपके शौक, परिवार की छुट्टियां जैसी जानकारी की मदद से फेसबुक ऐसी कंपनियों के विज्ञापन आपको दिखाता है जो आपको नयी गाड़ियों के लॉन्च, छुट्टियां, बाइक और ऐसी चीज़ों के बारे में बताता है.
साल 2016 की दूसरी तिमाही में फेसबुक ने विज्ञापनों से 42,000 करोड़ रुपए बनाये, जो पिछले साल के मुकाबले 63 फीसदी ज़्यादा है.
फेसबुक का मूल मंत्र ये है कि जितना ज़्यादा हो सके डेटा इकट्ठा कर लो. उसके बाद जो भी विज्ञापन देने वाली कंपनियां है जो ऐसे लोग तक अपने सन्देश पहुंचाना चाहती हैं, उनके विज्ञापन ऐसे लोगों तक पहुंचाओ. अगर फेसबुक के विज्ञापन करने के तरीके के बारे में जानना है तो यहां पढ़ सकते हैं. फेसबुक ने विज्ञापन देने के तरीके के बारे में यहां विस्तार से बताया है.
तो क्या, अगर आप चाहें, फेसबुक के विज्ञापनों से बचने का तरीका है? अगर फेसबुक का अकाउंट एक्सेस करना है तो विज्ञापनों से बचना संभव नहीं है. आजकल ऑनलाइन शेयर करने की आदत ऐसी बढ़ गई है, जिससे लोगों का उसके बिना रहना मुश्किल है.
अगर आप अपने वेबसाइट पर विज्ञापन कंट्रोल करने के ऐड ब्लॉकर प्लस या प्राइवेसी बैजर जैसे ब्राउज़र एक्सटेंशन डाउनलोड कर लेते हैं तो फेसबुक आपके कंप्यूटर पर काम नहीं करेगा इसलिए भी आजकल फेसबुक और ऐड ब्लॉकर की लड़ाई पूरे उफान पर है.

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