cartoon

एकल परिवारों के इस दौर में मासूम बच्चे कार्टून चरित्रों के मोहजाल में फंसकर रह गए हैं। स्कूल के अलावा मिलने वाले समय का बड़ा हिस्सा बच्चे कार्टून कार्यक्रम देखने में लगाते हैं। छुट्टियों में तो इन्हें देखने में बच्चे और भी ज्यादा समय बिताते हैं। देखने में आ रहा है कि जीवन की भागदौड़ में उलझे अभिभावक भी इन कार्यक्रमों को बच्चों के लिए समय बिताने का आसान सा जरिया समझ बैठे हैं। बच्चे अकेले ही अपनी दिनचर्या का बड़ा हिस्सा इन्हें देखने में बिताते हैं। इन कार्यक्रमों में क्या दिखाया जा रहा है? यह अभिभावकों को पता तक नहीं होता। आजकल ऐसे कई कार्टून हैं जो हिंसा और अंधविश्वास भी फैला रहे हैं।

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