बिजनौर बैराज पुल, जो कभी क्षेत्र की जीवनरेखा माना जाता था, आज सरकारी लापरवाही और भ्रष्टाचार का जीता-जागता सबूत बन चुका है। इस पुल की बदहाली न केवल इंजीनियरिंग की विफलता है, बल्कि उन जिम्मेदार अधिकारियों की नीयत पर भी सवाल उठाती है, जिन्होंने जनता की सुरक्षा को ताक पर रखकर अपनी जेबें भरने को प्राथमिकता दी।
रखरखाव के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति
पुल के बेयरिंग में न तो समय पर ऑयलिंग हुई और न ही ग्रिसिंग। सूत्रों का दावा है कि सालों से इस पुल की मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बेयरिंग, जो पुल की मजबूती का आधार हैं, उनकी देखभाल के लिए जरूरी रखरखाव को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। नतीजा? गेट नंबर 20 और 21 के बीच स्लैबों में खतरनाक गैप और अत्यधिक हिलना, जिसके चलते पुल को यातायात के लिए बंद करना पड़ा।
जांच में देरी, जनता की जान जोखिम में
जब पुल की बदहाली सामने आई, तो नेशनल हाईवे प्राधिकरण ने केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान और आईआईटी रुड़की के ब्रिज विशेषज्ञों से संपर्क किया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि महीनों बीत जाने के बाद भी ये विशेषज्ञ मौके पर नहीं पहुंचे। बस फोटो भेजकर खानापूर्ति की जा रही है। क्या जनता की सुरक्षा के लिए इतनी लापरवाही बर्दाश्त की जाएगी? यह सवाल हर उस नागरिक के मन में है, जो इस पुल से रोज गुजरता था।
भ्रष्टाचार का खुलासा: हर जगह खामियां
हाल ही में मशीनों से की गई जांच ने चौंकाने वाला सच सामने लाया। न केवल एक जगह, बल्कि कई जगहों पर बेयरिंग जाम पाए गए। गेट नंबर 28 के पास बेयरिंग का कंक्रीट आधार (पेडस्टल) भी टूटा हुआ मिला। गेट नंबर 20 और 21 के बीच की स्थिति तो और भी खराब थी। यह हालात साफ तौर पर बताते हैं कि रखरखाव के नाम पर केवल कागजी कार्रवाई हुई, जबकि धरातल पर कुछ नहीं किया गया।
जनता से सवाल: कब तक सहें भ्रष्टाचार?
सवाल यह है कि आखिर इतने महत्वपूर्ण ढांचे की ऐसी दुर्दशा क्यों? क्या रखरखाव के लिए आवंटित बजट सही जगह इस्तेमाल हुआ? या फिर यह पैसा भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया? सूत्रों का कहना है कि सालों से मरम्मत के नाम पर केवल दिखावा हुआ, जबकि पुल की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती रही।
जनता की मांग: सख्त कार्रवाई और जवाबदेही
बिजनौर बैराज पुल की यह स्थिति केवल एक ढांचे की खराबी नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार का नंगा सच है। जनता अब जवाब मांग रही है। आखिर कब तक सरकारी लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण उनकी जान को जोखिम में डाला जाएगा? क्या अब समय नहीं आया कि जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो और इस पुल को जल्द से जल्द सुरक्षित बनाया जाए?
यह वक्त है कि हम सब मिलकर इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाएं और सुनिश्चित करें कि जनता की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
Comments